होली पर्व: रंगों, उल्लास, परंपरा, सामाजिक समरसता और पर्यावरण जागरूकता का महोत्सव


रिपोर्ट आबिद शमीम


 

नंदगंज(गाज़ीपुर)।होली भारत का एक प्रमुख और अत्यंत लोकप्रिय त्योहार है, जिसे रंगों का पर्व भी कहा जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और देशभर में हर्षोल्लास के साथ आयोजित होता है।

इस त्योहार का पौराणिक संबंध प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका की कथा से जुड़ा है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देती है। होली से एक दिन पूर्व होलिका दहन किया जाता है, जो इसी प्रतीकात्मक विजय का उत्सव है।

देश के विभिन्न हिस्सों में होली की अलग-अलग झलक देखने को मिलती है। मथुरा, वृंदावन और बरसाना की होली विश्व प्रसिद्ध है। वहीं पश्चिम बंगाल में ‘बसंत उत्सव’ के रूप में यह पर्व मनाया जाता है, जिसकी परंपरा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने शांतिनिकेतन में प्रारंभ की थी।

होली सामाजिक समरसता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देती है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं और मिठाइयाँ बांटते हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक रंगों के उपयोग और जल बचत पर भी जोर दिया जा रहा है।

इस प्रकार होली भारतीय संस्कृति, परंपरा और उत्साह का जीवंत प्रतीक है, जो समाज में प्रेम और सकारात्मकता के रंग भरती है।

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