नंदगंज (गाज़ीपुर)क्षेत्र में इन दिनों बच्चों में पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं। अभिभावकों का कहना है कि बाहर की खुली और पैकेटबंद खाद्य वस्तुओं के सेवन के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है।
बाहर का खाना बन रहा बीमारी की वजह
डॉक्टरों के अनुसार, बाजार में बिकने वाली कई खाद्य सामग्री लंबे समय तक खुले में रखी रहती हैं, जिससे उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे अक्सर चिप्स, नमकीन, बिस्कुट, टॉफी और अन्य पैकेटबंद चीजें खरीदते समय उनकी एक्सपायरी डेट नहीं देखते। यही लापरवाही उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
स्थानीय चिकित्सकों ने सलाह दी है कि बच्चों को बाहर की तली-भुनी और खुली चीजें खाने से बचाया जाए। खासकर गर्मी और बरसात के मौसम में खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
होटल का खाना भी सुरक्षित नहीं
केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि बड़े भी होटल और ढाबों के खाने से बीमार पड़ रहे हैं। कई लोगों ने शिकायत की है कि बाहर खाना खाने के बाद उन्हें पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और उल्टी जैसी समस्याएं हुईं। लोगों का कहना है कि स्थानीय होटलों में साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं होती, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि दुकानों और होटलों की नियमित जांच कराई जाए। एक्सपायरी उत्पाद बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाया जाए।
अभिभावकों को बरतनी होगी सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावक बच्चों को घर का ताजा और पौष्टिक भोजन देने पर जोर दें। बच्चों को यह भी सिखाया जाए कि वे पैकेटबंद सामान खरीदते समय उसकी निर्माण और एक्सपायरी तिथि अवश्य देखें। स्वच्छता और संतुलित आहार ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
अगर समय रहते जागरूकता नहीं बढ़ाई गई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
