गाजीपुर। भांवरकोल विकासखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक आस्था के केंद्र श्रीपुर गांव में नवनिर्मित भव्य शिव मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में इस मंदिर को लेकर श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत, समर्पण और सामूहिक सहयोग का परिणाम आज भव्य रूप में सबके सामने खड़ा है।
मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पूर्व बुधवार को बड़े धूमधाम और विधि-विधान के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यह कलश यात्रा ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और हर-हर महादेव के जयकारों के साथ श्रीपुर गांव से प्रारंभ होकर कोटवा नारायनपुर गंगा घाट पहुँची। गंगा घाट पर श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर पवित्र गंगा जल अपने कलशों में भरा और फिर शोभायात्रा के रूप में वापस शिव मंदिर तक पहुंचे।
इस दौरान महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक परिधानों में शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस यात्रा में उमड़ी, जिससे कार्यक्रम भव्य बन गया।
कार्यक्रम के अनुसार, महाशिवरात्रि पर्व रविवार के दिन नवनिर्मित शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठान और विद्वान आचार्यों की उपस्थिति में प्राण प्रतिष्ठा समारोह भव्य रूप से संपन्न होगा। इसे लेकर पूरे गांव में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। पंडाल, सजावट, विद्युत व्यवस्था और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध किया जा रहा है।
प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन अर्थात सोमवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी प्रसाद ग्रहण करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह भंडारा सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे का प्रतीक होगा।
उल्लेखनीय है कि इस भव्य शिव मंदिर का शिलान्यास 12 अक्टूबर 2024 को बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ रेनूबाला राय पत्नी अरुण राय तथा दिनेश शर्मा पुत्र छट्टु शर्मा के कर-कमलों द्वारा मंगलकामना के साथ संपन्न हुआ था। उस समय से ही मंदिर निर्माण का कार्य निरंतर जारी रहा।
मंदिर निर्माण में श्रीपुर गांव के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। किसी ने आर्थिक सहयोग दिया तो किसी ने श्रमदान किया, जिससे यह शिव मंदिर समय पर बनकर तैयार हो गया। आज मंदिर के भव्य स्वरूप को देखकर ग्रामीण गर्व और संतोष का अनुभव कर रहे हैं।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर पूरे क्षेत्र में उल्लास का वातावरण है। श्रीपुर गांव के बुजुर्ग इसे गांव के लिए ऐतिहासिक क्षण मान रहे हैं, जबकि युवा पीढ़ी इसे धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देख रही है।
