भांवरकोल । अमरूपुर (तरका)ग्राम में चल रहे श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ 24 जनवरी से 2 फरवरी तक होने ने यज्ञ में परम संत कन्हैया दास जी महाराज ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ, दान ,तप हमेशा करना चाहिए। अपने सामर्थ्य के अनुसार सहयोग व आयोजन करते रहना चाहिए। जिससे भगवत कृपा का सहज लाभ मानव जीवन को मिलता रहे। उन्होंने कहा कि यज्ञ से प्रकृति एवं समाज का संस्कार होता है। जीव में भक्ति ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके दर्शन मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ का धुआं वातावरण एवं वायु मंडल को शुद्ध करने के साथ लोगों के आत्मबल को बढ़ाता है। यज्ञ से वातावरण में शुद्धता के साथ-साथ अपने भीतर के अवगुण भी दूर होते हैं। साथ ही समाज में भाईचारगी एवं सद्भाव का वातावरण का सृजन होता है । उन्होंने बताया कि यज्ञ के दौरान सभी देवतागण सूक्ष्म रूप से उपस्थित होकर जीव को आशीर्वाद देते हैं। कहा कि ” कलयुग केवल नाम अधारा ” सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा। इस कलिकाल में भगवान का स्मरण मात्र से जीव के सभी पापों से मुक्ति का एक मात्र आधार ईश्वर की भक्ति ही है। भगवान का नाम स्मरण करने से ही भक्तों को मोक्ष का रास्ता प़शस्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ से मन, शरीर, और बुद्धि जागृत होती है तथा आत्मज्ञान और आत्म-साक्षात्कार होता है।शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।जीवन में सफलता और समृद्धि मिलती है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी नारायण महायज्ञ सवेऀश्वर पूजा का शक्तिशाली और सर्वोच्च रूप है। सभी प्राणियों के कल्याण, सार्वभौमिक शांति और समृद्धि एवं विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। इस मौके पर गा़म प्रधान राजेश राय बंगाली, पूर्व प्रधान मनोज पाण्डेय, पंकज राय सहित काफी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
यज्ञ से जीव में भक्ति ,ज्ञान एवं सद्भाव के गुण उत्पन्न होते है – संत कन्हैया दास जी महराज
