माटी की खुशबू में लिपटा शौर्य: देश के लिए बलिदान हुए वीर सपूत रोशन यादव, गांव में उमड़ा जनसैलाब


शादियाबाद (गाजीपुर)।

शादियाबाद थाना क्षेत्र के वीर सपूत रोशन यादव ने देश की रक्षा करते हुए मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। जैसे ही उनके शहीद होने की सूचना गांव और क्षेत्र में पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम थी, लेकिन इस बात का गर्व भी था कि गांव का लाल देश की रक्षा करते हुए अमर हो गया।

थाना चौराहे पर उमड़ा जनसैलाब, गूंजे देशभक्ति के नारे

शहीद जवान रोशन यादव का पार्थिव शरीर जब दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर शादियाबाद थाना चौराहा पहुंचा, तो वहां पहले से ही भारी संख्या में लोग मौजूद थे। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर वहां पहुंचा, पूरा शादियाबाद

“भारत माता की जय” और “शहीद रोशन यादव अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। हर ओर देशभक्ति का माहौल नजर आया।

पैतृक गांव पहुंचते ही टूट पड़ा जनसैलाब

इसके बाद शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। तिरंगे में लिपटे वीर सपूत को देख ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। मां की करुण चीत्कार, पिता की नम आंखें और भाई-बहनों का मौन दर्द हर किसी की आंखों को नम कर गया। पूरा गांव शोक और गर्व के मिले-जुले भाव में डूबा नजर आया।

देशसेवा ही था जीवन का लक्ष्य

वीर शहीद रोशन यादव बचपन से ही अनुशासनप्रिय, मेहनती और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना उनका सपना था, जिसे उन्होंने कठिन परिश्रम और संकल्प के बल पर पूरा किया। ड्यूटी के दौरान उन्होंने अदम्य साहस, कर्तव्य निष्ठा और वीरता का परिचय देते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

शहीद रोशन यादव को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। अंतिम संस्कार में क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए। हर कोई नम आंखों से वीर सपूत को नमन करता नजर आया।

नेताओं व प्रशासन ने अर्पित की श्रद्धांजलि

शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी और आम नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचे। वक्ताओं ने कहा कि

“रोशन यादव का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका नाम देश के वीर सपूतों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।”

प्रशासन की ओर से शहीद के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया।

गांव को है अपने लाल पर गर्व

गांव और क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रोशन यादव सिर्फ एक परिवार के नहीं, बल्कि पूरे गांव और इलाके के बेटे थे। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, साहस और समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

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