नेताजी सुभाष ग्रामोत्थान सेवा संस्थान और साहित्य चेतना समाज के संयुक्त तत्वावधान में बसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर आयोजित की कवि सम्मेलन और विचार गोष्टी


गाज़ीपुर: नेताजी सुभाष ग्रामोत्थान सेवा संस्थान और साहित्य चेतना समाज के संयुक्त तत्वावधान में बसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के अवसर पर ताड़ीघाट में विचार-गोष्ठी सह कवि-गोष्ठी आयोजित की गई।कार्यक्रम के मुख्यअतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमल नयन पाण्डेय एवं विशिष्ट अतिथि आर एस एस के नगर सम्पर्क प्रमुख दुर्गा दत्त चतुर्वेदी एवं साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ थे।अध्यक्षता कैप्टन महेन्द्र यादव ने की।कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं सुभाष चन्द्र बोस के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण-पुष्पार्चन से हुआ।अतिथियों का स्वागत संस्थान के सचिव डा.प्रेमशंकर सिंह ने किया।मुख्य अतिथि कमल नयन पाण्डेय ने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व जीवन में नई उमंग,उत्साह एवं ऊर्जा का संचार करता है।नेताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि माँ भारती के इस अमर सपूत ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।उनको जो सम्मान मिलना चाहिए था,वह उन्हें नहीं मिला।

कवि-गोष्ठी का शुभारंभ संजय पाण्डेय की वाणी वंदना से हुआ।युवा शायर गोपाल गौरव ने ‘राहे वफा से गुजरना पड़ेगा/मुहब्बत करोगे तो मरना पड़ेगा’ सुनाकर श्रोताओं ढेर सारी वाहवाही लूटी।सुपरिचित गीतकार नागेश मिश्र ने बसंत पर केन्द्रित अपना यह गीत ‘आओ एक ही राग अलापें/बढ़ते चलें संग-संग/मानवता की पौध उगाने/अब के बसंत के संग’ सुनाकर खूब तालियाँ बटोरीं।साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने नेताजी को स्मरण करते हुए ‘आगे बढ़ते उत्साही को/कब रोक सकीं दुर्गम राहें/मंजिल खुद उसे बुलाती है/फैला करके दोनों बाहें’ पढ़ीं।युवा कवि आशुतोष श्रीवास्तव ने ‘नेताजी तुम अमर हो/तुम्हारी है अमर कहानी/माँ भारती पर वार दी तूने/अपनी भरी जवानी’ सुनाकर नेताजी को श्रद्धासुमन अर्पित किया।प्रख्यात् शायर बादशाह राही ने ‘हमसे मत पूछिए देते हैं तो क्या देते हैं/हम मुहब्बत से मुहब्बत का सिला देते हैं/क्या बचाएंगे वो जलने से नशेमन मेरा/अपने दामन से जो शोलों को हवा देते हैं’ सुनाकर श्रोताओं को रससिक्त कर दिया। कवयित्री प्रीतम कुशवाहा ने भारत माँ का ये आँचल/तिरंगा जान से प्यारा है/प्यारा देश हमारा है’ एवं वरिष्ठ कवि सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’ ने शहीदों के लहू पर दाग हम लगने नहीं देंगे/इस पावन तिरंगे को हम कभी झुकने नहीं देंगे’ सुनाकर श्रोताओं में देशभक्ति की भावना का संचार कर दिया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से दुर्गा दत्त चतुर्वेदी,अजय कुमार सिंह,कमलेश प्रकाश सिंह,श्रीकृष्णा सिंह,पंकज यादव,रामाश्रय सिंह आदि उपस्थित थे।कार्यक्रम की अध्यक्षता कैप्टन महेन्द्र यादव एवं संचालन सत्येन्द्र नाथ द्विवेदी ने किया।

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