गहमर का “खूनी खेल”: आक्रोश की आग में झुलसी खाकी; 2 कोतवाल और 2 सिपाही नपे


गाजीपुर (गहमर): गाजीपुर का गहमर इलाका इस वक्त जनाक्रोश के बारूद पर बैठा है। 24 दिसंबर की रात हुए नृशंस हत्याकांड ने न केवल यूपी पुलिस के इकबाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि महकमे के भीतर फैले लापरवाही के दीमक को भी उजागर कर दिया है। पीड़ित परिवारों के भारी दबाव और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बाद अब गहमर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी हुई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट: दरिंदगी की इंतिहा

तालाब से बरामद विक्की सिंह और सौरभ सिंह के शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने अपराधियों की क्रूरता की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, विक्की सिंह के सिर और चेहरे पर धारदार और नुकीले हथियारों से 4 गहरे वार किए गए थे। जिस तरह से हत्यारों ने इस वारदात को अंजाम दिया, उसने साफ कर दिया कि उन्हें कानून का रत्ती भर भी भय नहीं था।

परिजनों का गंभीर आरोप

घटना के बाद गहमर कोतवाली का दृश्य किसी युद्ध क्षेत्र से कम नहीं था। परिजनों और ग्रामीणों ने कोतवाली घेरकर जमकर प्रदर्शन किया। लोग चिल्ला-चिल्लाकर आरोप लगा रहे थे कि “प्रशासन बिका हुआ है” और पुलिस अपराधियों को संरक्षण दे रही है। प्रदर्शनकारियों ने तो यहाँ तक कह दिया कि पुलिस केवल रसूखदारों के इशारों पर नाच रही है, जबकि आम आदमी का लहू सड़कों पर बह रहा है।

खाकी पर गिरी गाज

सूत्रों से खबर है कि मामले की गंभीरता और पुलिस की खुली लापरवाही को देखते हुए पुलिस अधीक्षक  ने लापरवाही के आरोप में गहमर प्रभारी निरीक्षक दीनदयाल पांडे, थाने में तैनात दो सिपाहियों एवं सैदपुर थाना प्रभारी शैलेश कुमार मिश्रा को लाइन हाजिर कर दिया है। एसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था और जांच में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


“गहमर की जनता अब केवल तबादले नहीं, बल्कि अपराधियों की गिरफ्तारी और सलाखों के पीछे उनके अंजाम का इंतजार कर रही है।”

 

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