क्या बलिया की एफआईआर ने खोला गाजीपुर के वसूली गैंग का राज?


बलिया/गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के बलिया और गाजीपुर जिलों की सीमा पर स्टिकर के नाम पर चल रहे अवैध वसूली के खेल ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। गाजीपुर के कासिमाबाद थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस पूरे मामले का सूत्रधार बलिया के रसड़ा थाने में दर्ज वह एफआईआर है, जिसमें एक पीड़ित ने पुलिस वर्दीधारियों पर धन उगाही का आरोप लगाया था। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी औपचारिक संबंध की पुष्टि अभी तक विभाग द्वारा नहीं की गई है, लेकिन कार्यप्रणाली में दिख रही समानताएं कई बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।

बलिया की एफआईआर: वर्दी की आड़ में धमकाने का आरोप

बीते 21 दिसंबर को बलिया के रसड़ा निवासी रामेश्वर सिंह उर्फ डब्बू ने रसड़ा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के अनुसार रसड़ा-कासिमाबाद राज्य मार्ग पर स्थित सिलहटा के पास उन्हें रोका गया जहां जैकेट पहने कुछ लोग, जिनमें दो पुलिस वर्दी में थे, वाहनों पर जबरन स्टिकर चिपकाकर पैसे वसूल रहे थे पैसे देने से मना करने पर रामेश्वर सिंह को जान से मारने की धमकी दी गई और उनका चालान काटने की बात कही गई जब रसड़ा पुलिस ने इस पूरे मामले को जाना तो तत्काल ही बीएनएस की धारा 308(4) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दिया।

गाजीपुर में बड़ी कार्रवाई: SHO समेत चार निलंबित

इस घटना के कुछ ही दिनों बाद 24 दिसंबर को गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ने एक कड़ा आदेश जारी किया इस आदेश में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते नन्दकुमार तिवारी, प्रभारी निरीक्षक कासिमाबाद को पर्यवेक्षण में लापरवाही,विनय सिंह आरक्षी, थाना कासिमाबाद, सर्वेश यादव होमगार्ड तथा आशीष सिंह, आरक्षी चालक परिवहन शाखा को QR कोड के जरिए वसूली के आरोप में निलंबित कर दिया।

निलंबन आदेश के चौंकाने वाले तथ्य

निलंबन आदेश में बहुत बड़ा चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा हुआ जांच में पाया गया कि ये कर्मी 16 दिसंबर से ही कासिमाबाद गाजीपुर और रसड़ा बलिया क्षेत्र में वाहनों को रोककर प्रति स्टिकर 200 रुपये की वसूली कर रहे थे। यहाँ तक कि आरक्षी आशीष सिंह द्वारा दिए गए QR कोड पर ऑनलाइन भुगतान भी लिए जा रहे थे।

संकेत या संयोग, क्या है दोनों का कनेक्शन?

भले ही आधिकारिक रूप से इन दोनों मामलों को एक नहीं बताया गया है, लेकिन कुछ मुख्य बिंदु हैं जो मामले को आपस में जोड़ते हैं

“एफआईआर रसड़ा-कासिमाबाद मार्ग की है, और गाजीपुर का निलंबन आदेश भी इसी क्षेत्र में वसूली की पुष्टि करता है।”

“दोनों ही मामलों में स्टिकर चिपकाने को वसूली का माध्यम बनाया गया है।”

“बलिया की घटना 21 दिसंबर की है, और गाजीपुर पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि वे 16 दिसंबर से लगातार सक्रिय थे।”


फिलहाल गाजीपुर के पुलिसकर्मी विभागीय जांच का सामना कर रहे हैं और उन्हें पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। चर्चा यह है कि रामेश्वर सिंह की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच ने ही इस सिंडिकेट की पोल खोली है, लेकिन पुलिस के आला अधिकारी द्वारा इस मामले को आंतरिक भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के अलावा और कोई पुष्टि नहीं की गई है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बलिया की एफआईआर में नामजद अज्ञात वर्दीधारी वही हैं जिन्हें गाजीपुर में निलंबित किया गया है या वर्दी की आड़ में कोई और ही था।

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