गाजीपुर। जनपद के पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका सनसनीखेज खुलासा कासिमाबाद क्षेत्र में हुआ है। जहाँ रक्षक ही भक्षक बनकर सड़कों पर अवैध वसूली का काला कारोबार चला रहे थे। इस मामले में गाजीपुर पुलिस अधीक्षक ने सख्त रुख अपनाते हुए कासिमाबाद के थाना प्रभारी नन्दकुमार तिवारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।
प्राइवेट ‘गुर्गे’ के दम पर वसूली का खेल
जांच में सामने आया है कि कासिमाबाद पुलिस ने अवैध वसूली के लिए धीरज गिरी नाम के एक बाहरी व्यक्ति को अपना ‘कलेक्शन एजेंट’ बना रखा था। 16 दिसंबर 2025 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच कासिमाबाद और रसड़ा की सड़कों पर यह खेल धड़ल्ले से चल रहा था। धीरज गिरी, पुलिसकर्मियों के सहयोग से वाहनों को रोकता था और उन पर अनधिकृत रूप से स्टीकर लगाता था।
डिजिटल रिश्वत और ‘डेली टारगेट’
♦ “हर वाहन चालक से स्टीकर के नाम पर 200-200 रुपये की अवैध वसूली की जाती थी।”
♦ “प्रतिदिन लगभग 14,000 से 15,000 रुपये की अवैध राशि वसूली जा रही थी।”
♦ “भ्रष्टाचार को आधुनिक बनाते हुए आरक्षी आशीष सिंह ने रिश्वत के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया, जिसमें 4,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।”
कासिमाबाद कोतवाल की लापरवाही पड़ी भारी
निलंबन आदेश के अनुसार, प्रभारी निरीक्षक नन्दकुमार तिवारी का अपने अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं था। उनकी पर्यवेक्षण में भारी शिथिलता पाई गई, जिसके कारण उनके नाक के नीचे सिपाही और होमगार्ड मिलकर अवैध उगाही कर रहे थे। आरक्षी आशीष सिंह और आरक्षी मुंशी विनय सिंह को इस भ्रष्टाचार में सीधे तौर पर लिप्त पाया गया है।
विभागीय जांच शुरू, मुख्यालय छोड़ने पर पाबंदी
पुलिस अधीक्षक गाजीपुर ने स्पष्ट किया है कि तीनों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कर दी गई है निलंबन की अवधि में इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, लेकिन इन्हें बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, इन्हें यह प्रमाण पत्र देना होगा कि ये किसी अन्य निजी व्यापार में शामिल नहीं हैं।
