कोरौली, मऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री आदरणीय एके शर्मा ने घोसी तहसील अंतर्गत स्थित वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण राय के पैतृक गांव कोरौली पहुंचकर एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की। मंत्री एके शर्मा ने “मां के नाम एक पेड़” लगाकर न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि संबंधों और संवेदनाओं से जुड़ी एक गहरी मानवता की भावना भी प्रकट की।
पर्यावरण संरक्षण को दी नई परिभाषा
वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान श्री शर्मा ने कहा कि “मां सिर्फ जननी नहीं, प्रकृति की तरह पोषण करने वाली शक्ति हैं। मां के नाम एक पेड़ लगाकर हम प्रकृति और ममता—दोनों को नमन कर सकते हैं।”
इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से भी अपील किया कि हर व्यक्ति अपने माता-पिता या किसी प्रियजन के नाम एक पौधा जरूर लगाए। उन्होंने इसे केवल एक पर्यावरणीय कदम नहीं, बल्कि “भावनात्मक उत्तरदायित्व” करार दिया।
भारी जनसमूह और भाजपा नेतृत्व की रही मौजूदगी
इस विशेष अवसर पर चीनी मिल्स लिमिटेड के उप सभापति रजनीश राय, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रवीण गुप्ता, वर्तमान जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य, कोरौली ग्राम सभा के अवधेश राय, रामराज राय, संजय राय, विमलकृष्ण राय, पंकज राय ‘बबलू’ इंद्रजीत राय, कक्कू राय, गिरिजा राय, रमेश राय, मनोज राय, दीपक राय, टंकू राय, रामसमुझ पटेल, पवन उपाध्याय सहित सैकड़ों की संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता उपस्थित रहे। गांववासियों ने मंत्री का भव्य स्वागत किया और उनके इस कदम को प्रेरणादायक और ऐतिहासिक बताया।
विकास कार्यों की समीक्षा, गांव के लिए मिली सौगातें
कोरौली पहुंचने पर मंत्री ने गांव के मूलभूत मुद्दों पर अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि विकास योजनाओं में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और काम गुणवत्ता व समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं।
पत्रकार प्रवीण राय के कार्यों की सराहना
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण राय की कार्यशैली और सामाजिक योगदान की प्रशंसा करते हुए मंत्री ने कहा कि “पत्रकारिता अगर समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाए, तो वह राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव बन सकती है। उनके गांव आने को स्थानीय मीडिया और ग्रामीणों ने एक सम्मान का प्रतीक माना और इसे पत्रकारिता तथा ग्रामीण समाज के प्रति मंत्री के लगाव की मिसाल बताया।
श्री एके शर्मा का “मां के नाम एक पेड़” अभियान न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और भावनात्मक क्रांति का प्रारंभ भी है। कोरौली गांव इस ऐतिहासिक पहल का साक्षी बन गया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी स्मरण करेंगी।
Edited by Umashankar
