शादियाबाद गाजीपुर। जनपद के मनिहारी क्षेत्र के ग्राम सभा शाहपुर शमशेर खान का वीर सपूत हरिकेश यादव झांसी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में शहीद हो गया। सोमवार तड़के करीब 5:30 बजे झांसी के बबीना थाना क्षेत्र के खैलार गांव के पास सेना के ट्रक और एक पिकअप वाहन की आमने-सामने भीषण टक्कर हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल जवान हरिकेश यादव को तत्काल इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बताया जा रहा है कि हरिकेश यादव बबीना फायरिंग रेंज में सैन्य अभ्यास पूरा कर अपनी यूनिट अलवर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और सेना के जवानों की मदद से उन्हें वाहन से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जैसे ही इस दुखद खबर की सूचना उनके पैतृक गांव शाहपुर शमशेर खान और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव में हर आंख नम है। लोग अपने वीर सपूत की शहादत पर गर्व तो कर रहे हैं, लेकिन दिल में अपार दुख भी है।
ग्रामीणों के अनुसार हरिकेश यादव बचपन से ही साहसी और देशभक्त स्वभाव के थे। सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना उनका सबसे बड़ा सपना था। वर्ष 2002 में उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की और पूरे समर्पण के साथ देश सेवा में जुटे रहे।
शहीद हरिकेश यादव (45) स्वर्गीय बीरबल यादव के पुत्र थे। उनका विवाह वर्ष 2003 में मधु यादव (42) से हुआ था। उनके परिवार में एक बेटी अर्पिता और एक बेटा है। माता मुखिया देवी सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। हरिकेश यादव अपने तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे और परिवार के बेहद जिम्मेदार सदस्य माने जाते थे।
सूचना के अनुसार शहीद हरिकेश यादव का पार्थिव शरीर मंगलवार 10 मार्च 2026 की सुबह करीब 07:00 बजे उनके पैतृक गांव शाहपुर शमशेर खान पहुंचेगा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा वीर सपूत अपने घर पहुंचेगा, पूरे गांव की आंखें नम हो जाएंगी। प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहकर अपने वीर सपूत को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे।
हरिकेश यादव की शहादत से पूरे गाजीपुर जनपद में शोक का माहौल है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि देश की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि का मान बढ़ाया है। उनका यह सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
माटी का यह लाल भले ही आज हमारे बीच नहीं रहा, लेकिन उसकी शहादत की गूंज हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवित रहेगी।
