धर्मेन्द्र भारद्वाज। मऊ
61 फीट ऊंची शिव प्रतिमा बनी आस्था का नया केंद्र, 9.38 करोड़ की परियोजना सीएसआर से पूरी
मऊ, 14 फरवरी 2026।
शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर जनपद को एक अहम धार्मिक और पर्यटन सौगात मिली। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए क शर्मा ने तमसा नदी तट स्थित मऊ महादेव धाम में नवनिर्मित भव्य घाटों का लोकार्पण किया।
करीब 9.38 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को ICICI Bank के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) फंड से पूरा किया गया है। धौलपुर के रेड स्टोन से सुसज्जित घाटों ने पूरे परिसर को नया स्वरूप दिया है।
61 फीट ऊंची शिव प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
घाट परिसर में स्थापित भगवान शिव की 61 फीट ऊंची कंक्रीट प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण बन गई है। राजस्थान के कारीगरों द्वारा तैयार यह प्रतिमा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र की धार्मिक पहचान को नया आयाम मिलेगा।
“माफिया नहीं, महादेव से होगी पहचान”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि जिस स्थान पर आज आरती और दर्शन हो रहे हैं, कभी वहां अव्यवस्था और असुरक्षा का माहौल था। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ कानून व्यवस्था और विकास कार्यों के चलते मऊ की छवि बदल रही है।
उनके शब्दों में, अब जनपद की पहचान भय से नहीं, आस्था और विकास से होगी।
‘यूपी का कैलाश’ बनाने की योजना
मंत्री ने घोषणा की कि मऊ महादेव धाम को उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विकसित करने का लक्ष्य है। अगले एक वर्ष में यहां एक आधुनिक ग्रीन पार्क विकसित किया जाएगा ताकि यह स्थल धार्मिक ही नहीं, पारिवारिक और सांस्कृतिक पर्यटन का भी केंद्र बन सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में आधारभूत ढांचे और धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसका असर जिलों में दिख रहा है।
आरती, लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रम
लोकार्पण अवसर पर भव्य आरती, लेजर शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
नवनिर्मित घाटों से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ ही स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि यदि नियोजित तरीके से विकास आगे बढ़ा, तो यह स्थल पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।
शिवरात्रि से ठीक पहले मिली यह सौगात मऊ के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ विकास के नए अध्याय की शुरुआत
