सेवराई (गाजीपुर)। करोड़ों रुपये की लागत से बने अधिकांश पंचायत भवन तहसील क्षेत्र में बंद पड़े हैं। इन भवनों को मिनी सचिवालय के रूप में विकसित करने की योजना थी, ताकि ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र आदि के लिए तहसील या ब्लॉक मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। पंचायत सहायक की तैनाती से ग्रामीण समस्याओं का त्वरित निस्तारण होना था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
भदौरा विकास खंड के खजुरी, फरीदपुर सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों की पड़ताल में पाया गया कि ज्यादातर पंचायत भवनों पर ताले लटके हुए हैं। ‘गांव की सरकार’ ग्राम प्रधानों के निजी आवासों से ही चल रही है। मुहर, रजिस्टर और अन्य जरूरी दस्तावेज प्रधानों के घरों में रखे जाते हैं, वहीं से प्रमाणपत्र जारी हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सहायक की तैनाती केवल कागजों तक सीमित है और भवन मुश्किल से कभी खुलते हैं। ग्राम सचिव भी अधिकांश काम ब्लॉक मुख्यालय से ही निपटाते हैं।
इस कारण करोड़ों की लागत वाले ये भवन महज शोपीस बनकर रह गए हैं। क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में भवन या तो अधूरे हैं या पूरी तरह बंद पड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण की पूरी राशि पहले ही जारी हो चुकी है। भदौरा विकास खंड से करीब सात किलोमीटर दूर खजुरी और फरीदपुर गांवों के पंचायत भवनों पर भी ताले लगे मिले। पलिया, सेवराई, देवकली, गहमर, सिंहानी जैसे कई अन्य गांवों में भी यही हाल है।
सचिव ब्लॉक मुख्यालय से काम संभाल रहे हैं, जबकि प्रधान और पंचायत सहायक घरों से पंचायत कार्य चला रहे हैं। इससे शासन की मिनी सचिवालय स्थापित करने की परिकल्पना पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी के. के. सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होती है, यह देखना बाकी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इन भवनों को तुरंत सक्रिय किया जाए और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
