भांवरकोल/गाजीपुर । क्षेत्र के कनुवान गांव में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ के चौथे दिन का दृश्य अत्यंत भावविभोर कर देने वाला रहा, जब भगवान श्रीकृष्ण के पावन जन्म प्रसंग का वर्णन हुआ। जैसे ही कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म का मंगलाचरण किया, सम्पूर्ण कथा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं और (नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की जय ) के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं ब्रजभूमि यहां साकार हो उठी हो।
वृंदावन से पधारे कथा व्यास प्रेमनिधि दास जी महाराज ने अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि जब-जब धरती पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब करुणा के सागर भगवान स्वयं अवतार लेकर भक्तों की पीड़ा हरते हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के अमर श्लोक (यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत… का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार केवल कंस के विनाश के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति को धर्म, प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाने के लिए हुआ।
कथा में कंस के अत्याचारों, माता देवकी और वासुदेव जी की कारावास में बीतती पीड़ादायक रातों का वर्णन करते हुए महाराज जी का स्वर करुणा से भर उठा। उन्होंने बताया कि जिस अंधेरी कारागार में निराशा का सन्नाटा था, वहीं आधी रात को जब श्रीकृष्ण ने अवतार लिया, तो प्रकाश फैल गया। बेड़ियां अपने आप खुल गईं, ताले टूट गए और पहरेदार निद्रा में चले गए। वासुदेव जी बालक श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे, जहां यमुना मैया ने भी भक्तवत्सल प्रभु को चरणों में नमन करते हुए मार्ग दिया।
गोकुल में नंद बाबा के आंगन में जैसे ही श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, सम्पूर्ण ब्रज आनंद में डूब गया। घर-घर मंगल गीत गूंज उठे, देवता पुष्पवर्षा करने लगे और ब्रज की गलियों में उत्सव छा गया। महाराज जी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि प्रत्येक भक्त के हृदय में प्रेम, विश्वास और आनंद के अवतरण का पर्व है।
जन्मोत्सव के क्षणों में श्रद्धालु अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर नृत्य करने लगे, भजन-कीर्तन से पंडाल गूंज उठा और अनेक भक्त भावविभोर होकर अश्रुपूरित नेत्रों से प्रभु के दर्शन में लीन हो गए। दीप प्रज्वलन, आरती और पुष्पवर्षा के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम व श्रद्धा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर मुख्य यजमान परशुराम उपाध्याय, आचार्य करुणा निधान दास,अनुभव शास्त्री जी, रामजी महाराज, सुनील पाण्डेय,अरुण उपाध्याय, रजनीश उपाध्याय, कमलेश उपाध्याय, राहुल पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य कथा सुनकर स्वयं को धन्य अनुभव किया।
