मुगलसराय (चन्दौली): स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के रौना गाँव में जमीन कब्जाने और गुंडागर्दी का एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसने पुलिसिया इकबाल को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पीड़ित अमित तिवारी ने गाँव के ही कुछ रसूखदारों पर अपनी पुश्तैनी जमीन को जबरन हड़पने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
पीड़ित के अनुसार, विपक्षी संजय तिवारी और रमाशंकर तिवारी ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर खुद ही जमीन की पैमाइश शुरू कर दी। अमित का कहना है कि जब उसने अपनी जमीन के असली कागजात और रजिस्ट्री दिखाई, तो दबंगों ने उन्हें सरेआम फर्जी बता दिया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उसे भद्दी-भद्दी गालियाँ दी गईं और जान से मारने की धमकी देकर इलाके में दहशत फैला दी गई।
वायरल ऑडियो: बेबसी की गूँज
इस पूरे घटनाक्रम का एक ऑडियो क्लिप भी जारी हुआ है, जो दबंगों की क्रूरता और पीड़ित के डर को साफ बयां कर रहा है। ऑडियो में स्पष्ट सुना जा सकता है कि दबंग किस तरह कानून को हाथ में लेने की बात कर रहे हैं। पीड़ित अमित, जो अपने परिवार का इकलौता सहारा है, इस कदर डर गया कि उसे अपनी जान बचाने के लिए मौके से भागना पड़ा। ऑडियो में अमित बार-बार शासन-प्रशासन पर अपना भरोसा जता रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट दिख रही है।
पुलिस की संदिग्ध भूमिका: खूंटा उखड़ा, पर इंसाफ नहीं!
मामले में सबसे विवादास्पद पहलू पुलिस का रवैया रहा है। जांच अधिकारी मौके पर पहुँचे और दबंगों द्वारा अवैध रूप से गाड़े गए खूंटों को तो उखाड़ दिया। पर साक्ष्य और ऑडियो क्लिप मौजूद होने के बावजूद, पुलिस ने अब तक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
बड़ा सवाल
“क्या चन्दौली पुलिस किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रही है? अगर पीड़ित के पास वैध कागजात हैं और ऑडियो में यह स्पष्ट है कि पीड़ित के साथ गाली गलौज हुआ, तो आखिर किसके दबाव में दोषियों को बचाया जा रहा है?”
पीड़ित अमित तिवारी ने स्पष्ट किया है कि “यदि मुकदमा दर्ज नहीं होता तो वह उच्चाधिकारियों के पास जाएगा। वह केवल कानून के दायरे में रहकर अपनी जमीन बचाना चाहता है।”
अब देखना यह है कि क्या जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाला प्रशासन इस बेबस पीड़ित को न्याय दिला पाता है या दबंगों की लाठी के आगे सिस्टम ऐसे ही मौन रहेगा।
