कुशीनगर। सेण्ट ऐण्ड्रयूज कॉलेज, गोरखपुर के रसायन विभाग में मशरूम तथा प्राकृतिक अर्क का उपयोग कर जिंक सल्फाइड नैनो कणों के संश्लेषण की एक नवीन जैव-आधारित प्रक्रिया विकसित की गई है। यह शोध प्रो. रोहित श्रीवास्तव, प्रो. मो. राशिद तनवीर एवं शोधार्थी चन्द्रेश कुमार गुप्ता द्वारा किया गया है, जिसे भारतीय पेटेंट कार्यालय के जनरल नंबर 1/2026 में दिनांक 02 जनवरी 2026 को प्रकाशित किया गया है।
शोध के अंतर्गत आयस्टर मशरूम, नीम एवं लौंग के पौधों से प्राप्त प्राकृतिक अर्क का उपयोग कर जिंक सल्फाइड नैनो कणों का ग्रीन (पर्यावरण-अनुकूल) संश्लेषण किया गया है। इस प्रक्रिया में जैव अणुओं को अपचायक एवं स्थिरीकरण एजेंट के रूप में प्रयोग किया गया है, जिससे विषैले रासायनिक तरीकों का सुरक्षित व प्राकृतिक विकल्प प्रस्तुत किया जा सके।
इस नवाचार का उद्देश्य न केवल नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पर्यावरण-संवेदी तकनीकों को बढ़ावा देना है, बल्कि इन जैव-निर्मित जिंक सल्फाइड नैनो कणों को प्रभावी ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सेंसिंग यंत्र, पराबैंगनी डिटेक्टर, केमो-सेंसर तथा जैव-सेंसिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना भी है। शोध में इनके उत्प्रेरक एवं जैव-चिकित्सीय गुणों को भी रेखांकित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि प्रो. रोहित श्रीवास्तव द्वारा पूर्व में भी विभिन्न वैज्ञानिक टीमों के साथ 10 से अधिक पेटेंट प्रकाशित किए जा चुके हैं, जिनका शोध जगत में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इस उपलब्धि पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एस. डी. राजकुमार ने शोध से जुड़े सभी शिक्षकों एवं शोधार्थी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

