धर्मेन्द्र भारद्वाज |
प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना दूसरे दिन भी जारी है। मौनी अमावस्या के अवसर पर उनकी पालकी यानी रथ यात्रा रोके जाने के विरोध में वे उसी स्थान पर धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़कर चली गई थी। कड़ाके की ठंड में शंकराचार्य ने पूरी रात अपने पंडाल में बिताई।
शंकराचार्य पिछले 23 घंटे से अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किए हैं। उन्होंने पानी पीना भी छोड़ दिया है। सोमवार दोपहर उन्होंने मौके पर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रशासन स्वयं आकर उनसे माफी नहीं मांगता, तब तक वे अपने आश्रम या शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि वे फुटपाथ पर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि इतिहास में जब भी शंकराचार्य स्नान के लिए गए हैं, पालकी में ही गए हैं और वे हर वर्ष इसी परंपरा के तहत माघ मेले में पालकी से गंगा स्नान करते रहे हैं।
उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक पुलिस-प्रशासन उन्हें सम्मान और तय प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन अब कभी भी शिविर में नहीं रहेंगे। भविष्य में फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करेंगे।
इससे पहले शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि शंकराचार्य ने रविवार से कुछ भी नहीं खाया है। अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा है। उन्होंने सोमवार सुबह उसी स्थान पर अपनी दैनिक पूजा और दंड तर्पण भी किया।
इधर, मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य की रथ यात्रा के दौरान हुए विवाद का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस ने मार्ग पर बैरिकेडिंग कर रखी थी। इसी दौरान शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच कहासुनी हो गई। आरोप है कि समर्थकों ने बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
मामले ने अब धार्मिक परंपरा, सम्मान और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
