गाजीपुर प्रशासन में हिम्मत है तो मुझ पर एफ आई आर दर्ज करे – दिव्य प्रकाश राय (आर टी आई एक्टिविस्ट)


गाजीपुर प्रशासन पर व्हिसलब्लोअर के परिवार रिश्तेदार को फर्जी मुकदमों में फंसाने का गंभीर आरोप।

 

शपथ-पत्र देकर दिव्य प्रकाश राय ने दी प्रशासन को खुली चुनौती

 2020 मनरेगा महा-घोटाले पर 5 साल से लीपापोती, प्रशासन के अपने ही अधिभार /स्पष्टीकरण नोटिस ने खोली पोल।

DM-CDO पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने एवं बलिया के R.T.I.कार्यकर्ता को दबंग लुटेरों गुंडों द्वारा धमकाने का आरोप

न्याय न मिलने पर सोशल मीडिया पर “ऑपरेशन पर्दाफाश” की चेतावनी


 

बलिया। बलिया जनपद के सोहाव निवासी एक R.T.I. कार्यकर्ता दिव्य प्रकाश राय जिन्होंने गाजीपुर जिला प्रशासन के खिलाफ एक धर्मयुद्ध छेड़ दिया है। यह मामला अब केवल एक भ्रष्टाचार की शिकायत नहीं, बल्कि एक नागरिक और एक अहंकारी तंत्र के बीच सीधी टक्कर में बदल गया है, जिसमें अब धमकियां, फर्जी मुकदमे और “प्रशासनिक आतंकवाद” के विरुद्ध एक शंखनाद है।

क्या है महा-घोटाला.?

 

आर टी आई एक्टिविस्ट दिव्य प्रकाश राय ने बताया कि यह मामला 2020 का है, जब भॉवरकोल ब्लॉक के ग्राम बलुआ तप्पेशाहपुर में 40 साल से बंद पड़ी नहर को केवल कागजों पर साफ दिखाकर लाखों रुपये का मनरेगा फंड लूट लिया गया। इस संगठित लूट में धनन्जय कुमार राय, बब्बन राय, अमर नाथ राय, सुनील राय जैसे कई साधन-संपन्न विधि विद्वान, प्रधानपति , प्रधान प्रतिनिधि जैसे अपात्र लोगों के विरुद्ध नामजद शपथ पत्र सहित शिकायत दिया गया है।

 

व्हिसलब्लोअर का शपथ-पत्र और प्रशासन का ऑपरेशन लीपापोती

 

दिव्य प्रकाश राय ने इस महा-घोटाले के खिलाफ पुख्ता दर्जनों R.T.I. सबूतों के साथ दि०:14 जुलाई, 2025 को जिलाधिकारी अवनीश कुमार के जनता दरबार में एक नोटरीकृत शपथ-पत्र दाखिल किया। लेकिन न्याय मिलने के बजाय, श्री राय का आरोप है कि उन्हें प्रशासन के “ऑपरेशन लीपापोती” और शह पर लूट गिरोह से शिकायत बंद न करने पर जान से मारने की धमकी गाली का सामना करना पड़ रहा है।

 

फर्जी जांच:

 

उनका आरोप है कि जांच का केवल दिखावा किया गया और बार- बार झूठी रिपोर्टों के आधार पर विगत 5 वर्षों से सभी IGRS शिकायतों ( संदर्भ सं०: 80019525001019, 8001952500 1085, 80019525001542, 60000250287239, 60000250287255, 6000025 0299998) को “निस्तारित” कर दिया जा रहा है। और शपथपत्र लेने वाले जिलाधिकारी गाजीपुर अवनीश कुमार और मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने बिना स्वलिखित अपने आख्या का अपने मातहतों की झूठी आख्या को बिना तर्कसंगत प्रत्युत्तर बहस के केवल आनलाइन कम्प्यूटर पर सिस्टम जनरेटेड बटन दबाकर निस्तारित कर रहे हैं।

 

 

झूठा आश्वासन:

C.D.O. संतोष कुमार वैश्य पर आरोप है कि उन्होंने 20 सितंबर, 2025 को तहसील दिवस मुहम्मदाबाद में शिकायत पत्र देते ही बोले कि यह तो बराबर आ रहा है और मोबाइल पर B.D.O. भॉवरकोल को आदेश भेजने का नाटक दिखावा किया, “अम्बुज कुमार राय की शिकायत है आदेश करके भेज रहा हूं इसमें 4 नामजदों को थाना पर लिखकर दे दों ” लेकिन उसके तुरंत बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता के सहयोगियों को गॉव में धमकाना और गाली-गलौज करना शुरू कर दिया।

 

फर्जी FIR:

आरोप है कि शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने के लिए, आरोपी धनंजय कुमार राय ने (जो मनरेगा लूट किया शिकायत के बाद सूत्रों से खबर है कि लखनऊ के किसी सरकारी खाता में रकम किसके आदेश से वापस जमा कर दिया है यह अभी जांच का विषय है ) साथ ही दिव्य प्रकाश राय के एक रिश्तेदार अम्बुज कुमार राय जिसने 20/9/25 को सीडीओ संतोष कुमार वैश्य को मुहम्मदाबाद में शिकायत दिया उस पर जान से मारने की धमकी का एक झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया, और प्रशासन मूक दर्शक बना रहा। और गांव में मनरेगा लुटेरों द्वारा बराबर जान मारने मां बहन की गाली दी जाती है साक्षी गवाहों के बावजूद लुटेरों का दबदबा है कि स्थानीय पुलिस भॉवरकोल पीड़ित की एफआईआर दर्ज नहीं करती है।

 

 

प्रशासन के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश: अधिभार नोटिस स्पष्टीकरण ने खोली पोल

 

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब यह खुलासा हुआ कि कार्यालय जिलाधिकारी गाजीपुर (अवनीश कुमार) ने खुद पिछले सत्रों ( 2017-18, और 2019-20,) में हुई अनियमितताओं के लिए तत्कालीन ग्राम प्रधान ऊषा देवी (गरीब दलित आरक्षित महिला जिसके प्रतिनिधि बब्बन राय रहे है ) पर **लगभग ₹85,050/- और ₹8,75,772 के अधिभार नोटिस स्पष्टीकरण* जारी किए है। श्री राय ने सवाल उठाया कि “जब प्रशासन को खुद पता है कि घोटाला हुआ है और वे अधिभार नोटिस स्पष्टीकरण जारी कर रहे हैं, तो फिर 2020-2021 के महा-घोटाले पर मेरे शपथ-पत्र पर F.I.R दर्ज करने से क्यों डर रहे हैं? यह दोहरा चरित्र क्या साबित करताहै?”

 

हिम्मत है तो मुझ पर F.I.R.करो ! – दिव्य प्रकाश राय की खुली चुनौती

 

प्रशासन की लीपापोती और धमकियों से तंग आकर, दिव्य प्रकाश राय ने आज एक अंतिम और खुली चुनौती जारी की है:

“मैं गाजीपुर के DM, CDO और SP को सीधी चुनौती देता हूँ। अगर मेरा शपथ-पत्र झूठा है, अगर मेरे तथ्य गलत हैं, तो मुझ पर, दिव्य प्रकाश राय पर, FIR दर्ज करो। मैं हर सजा भुगतने को तैयार हूँ। लेकिन अगर तुम में यह हिम्मत नहीं है, तो उन लुटेरों पर FIR करो जिन्हें तुम बचा रहे हो। यह लुका-छिपी का खेल बंद करो। यह धमकी और फर्जी मुकदमों का ‘प्रशासनिक आतंकवाद’ बंद करो।”

 

श्री राय ने जिला जज गाजीपुर,आयुक्त वाराणसी, DGP उ०प्र०, DGP भ्रष्टाचार निवारण संगठन मुख्यालय लखनऊ, राज्यपाल,उ०प्र० सरकार, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राष्ट्रपति, “भ्रष्टाचार मुक्त भारत” का उदघोष कर्ता PMO, से लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, तक को पत्र सभी विंदुवार लिखकर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि **क्या न्याय के मंदिर इतने ऊंचे हो गए हैं कि नीचे एक नागरिक की चीख सुनाई नहीं देती? यह गाजीपुर प्रशासन जिला न्यायाधीश, हाईकोर्ट प्रयागराज और सुप्रीम कोर्ट, तीनों के लिए परीक्षा की घड़ी है। क्या वे एक नागरिक को मरवाने का इंतजार करेंगे, ताकि बाद में उसकी लाश पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जा सकें? जैसा कि अभी उत्तराखंड में हो रहा है।

 

यह मामला अब एक नजीर बन चुका है, जो यह सवाल पूछ रहा है कि क्या एक अकेला, दृढ़ संकल्पित नागरिक, सबूतों और कानून के बल पर, एक भ्रष्ट और अहंकारी तंत्र को घुटनों पर ला सकता है?

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