लखनऊ | प्रतियोगी छात्रों को IAS-PCS बनाने का सपना दिखाने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ में एक निजी कंपनी की बड़ी सेंधमारी सामने आई है। लखनऊ की आउटसोर्सिंग एजेंसी अवनि परिधि एनर्जी एण्ड कम्यूनिकेशन प्रा० लि० पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य लोगों को कोर्स-को-आर्डिनेटर बना दिया।
क्या है अवनि परिधि का खेल
समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक, आनंद कुमार सिंह द्वारा गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई FIR ने इस फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, निदेशालय ने मैनपावर सप्लाई के लिए अवनि परिधि कंपनी का चयन किया था। कंपनी को ऐसे अभ्यर्थियों का चयन करना था जिन्होंने पीसीएस मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण की हो। लेकिन, कंपनी ने खेल कर दिया। आरोप है कि कंपनी ने अभ्यर्थियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा और जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां करवा दीं।
69 में से 48 नियुक्तियां फर्जी
घोटाले की भयावहता आंकड़ों से साफ होती है। जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से 65 और विभाग से 4 अन्य यानी कुल 69 नियुक्त को-आर्डिनेटर्स का सत्यापन कराया गया, तो पता चला कि मात्र 21 अभ्यर्थी ही असली पात्र थे। इसका मतलब है कि बाकी अभ्यर्थियों के पास आवश्यक योग्यता नहीं थी, फिर भी अवनि परिधि ने उन्हें सिस्टम में घुसा दिया।
FIR में कंपनी और डायरेक्टर नामजद
मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2025 को गोमतीनगर पुलिस ने कंपनी और उसके अज्ञात आवेदकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता करने में जुट गई है कि यह सिर्फ एक कंपनी की गलती है, या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा है?

