“मेडिकल रिपोर्ट में झूठ बेनकाब होने के बाद भाजपा नेता प्रद्युम्न राय के लिए उठी न्याय की मांग”
गाजीपुर। सादात थाना क्षेत्र के कट्या गांव में 29 दिसंबर को हुई घटना ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था को गुमराह करते हुए, रंजिशन फंसाने की नीयत से रची गई फर्जी गोलीबारी की कहानी मेडिकल और पुलिस जांच में पूरी तरह झूठी साबित हुई है। अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि भाजपा नेता और स्कूल प्रबंधक प्रद्युम्न राय की छवि खराब करने और पुलिस का समय बर्बाद करने के आरोप में शिकायतकर्ता ऊषा राय के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मेडिकल रिपोर्ट ने खोली पिस्तौल और गोली की पोल
शिकायतकर्ता ऊषा राय ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे सूर्यांश राय पर पिस्टल से और रॉड से हमला हुआ यह आरोप अत्यंत ही गंभीर श्रेणी का था, जिसका उद्देश्य आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखना था लेकिन, सादात थानाध्यक्ष वागीश विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि जांच में गोली चलने की पुष्टि नहीं हुई है और न ही एक्स-रे रिपोर्ट में शरीर के अंदर कोई गोली मिली है।
ज्ञात हो कि 29 तारीख को वायरल वीडियो में भी घायल युवक के घाव को देखकर वहां मौजूद लोग इसे छर्रे का घाव मानने से इनकार कर रहे थे जो स्पष्ट करता है कि चोट की प्रकृति को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था।
पुलिस को गुमराह करना एक दंडनीय अपराध
कानून के जानकारों के मुताबिक, किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के लिए पुलिस को झूठी सूचना देना और अपराध की प्रकृति बदलना भारतीय न्याय संहिता के तहत गंभीर अपराध है।
प्रद्युम्न राय ने साक्ष्यों के साथ बताया कि वह घटना के वक्त वहां थे ही नहीं, बल्कि तेरही संस्कार से लौटकर अपने घर पर सीसीटीवी की निगरानी में बैठे थे, इसके बावजूद, ऊषा राय ने प्रशासन को गुमराह कर एक सम्मानित व्यक्ति और उनके होनहार बच्चों जो रूस में एमबीबीएस की छात्रा है एवं एक बच्ची उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में सेवा दे रही है, के भाई का भविष्य खराब करने की कोशिश की।
संपत्ति विवाद में बेटे का इस्तेमाल और प्रशासन को चुनौती
आरोपी पक्ष का कहना है कि ऊषा राय संपत्ति के लालच में अपने ही बेटे का इस्तेमाल कर रही हैं और कानून का दुरुपयोग हथियार के रूप में कर रही हैं। राय ने ऊषा राय पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि उन्होंने अपने बच्चे को शिक्षा से वंचित रखा जो बाल अधिकार उलंघन के तहत एक गंभीर मामला है।
एक साधारण विवाद को जानलेवा हमले का रंग देना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली का मजाक उड़ाना है, बल्कि यह उन वास्तविक पीड़ितों के साथ भी अन्याय है जिन्हें पुलिस की जरूरत होती है।
त्वरित कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और प्रद्युम्न राय के समर्थकों ने पुलिस अधीक्षक गाजीपुर से मांग की है कि “झूठे आरोपों के आधार पर दर्ज एफआईआर को तत्काल खारिज किया जाए।”
पुलिस को झूठी सूचना देने, गुमराह करने और मानहानि करने के आरोप में शिकायतकर्ता ऊषा राय के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी कानून का दुरुपयोग कर किसी संभ्रांत व्यक्ति की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ न कर सके।
“जब रक्षक ही झूठ का शिकार बनने लगें, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। चूंकि अब यह स्पष्ट हो चुका है कि गोली नहीं चली थी, पुलिस प्रशासन पर यह जिम्मेदारी है कि वह झूठी शिकायत करने वालों पर नकेल कसे, ताकि समाज में सत्यमेव जयते का नारा बुलंद रहे।”
