सरकारी धन का बंदरबांट: शिवपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा और विकास कार्यों में लाखों की हेराफेरी का आरोप, जिलाधिकारी से शिकायत


गाज़ीपुर/जखनियां: विकास खंड जखनियां स्थित ग्राम पंचायत शिवपुर में वित्त वर्ष 2021-22 से वर्तमान समय तक हुए मनरेगा और अन्य विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी निधि के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाते हुए ज़िलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपने का मामला संज्ञान में आया है। शिकायतकर्ताओं ने ग्राम प्रधान पर आवास आवंटन, इंटरलॉकिंग, सुंदरीकरण, समतलीकरण, सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण, नाला, स्ट्रीट/सोलर लाइट, ह्यूम पाइप, वृक्षारोपण, तथा कुर्सी खरीद जैसे 15 अलग-अलग मदों में लाखों रुपये के वित्तीय गबन का आरोप लगाया है और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मुख्य आरोप और अनियमितताएं

शिकायत पत्र में ग्राम प्रधान पर कई मामलों में गंभीर आरोप लगाए गए हैं

आवास योजना में अनियमितता: आरोप है कि पात्र लोगों को आवास नहीं मिले, जबकि प्रधान ने अपने ‘हेली-मेली’ (रिश्तेदारों और नज़दीकी लोगों) को आवास आवंटित कर दिए, और कुछ मामलों में अवैध रूप से धन लेकर अपात्रों को भी लाभ पहुँचाया गया।

इंटरलाकिंग और सड़क निर्माण: इंटरलॉकिंग का काम अधूरा दिखाया गया और पैसे का भुगतान हो गया। साथ ही, नई इंटरलॉकिंग के नाम पर पुरानी इंटरलॉकिंग को ही मरम्मत दिखाकर बजट पास कराने की शिकायत की गई है। सड़क निर्माण में पिछले कार्यकाल के काम को दिखाकर इस कार्यकाल में पैसे निकाले गए

सुंदरीकरण और समतलीकरण: पोखरी/अन्य जगहों के सुंदरीकरण का काम सिर्फ़ कागज़ों पर हुआ, मौके पर नहीं। समतलीकरण का काम भी प्रधान ने अपनी निजी ज़मीन पर न करके ‘हेली-मेली’ के खेतों पर दिखाकर सरकारी पैसे का भुगतान करा लिया

स्ट्रीट/सोलर लाइट और ह्यूम पाइप: आरोप है कि स्ट्रीट/सोलर लाइटें सार्वजनिक स्थानों की बजाय प्रधान ने अपने और अपने चुनावी संघ के लोगों के घरों के पास लगवाकर निजी लाभ दिलवाया। ह्यूम पाइप का इस्तेमाल कम जगह पर हुआ और कई पाइप अपने रिश्तेदारों और अन्य गांवों में भिजवा दिए गए

शौचालय निर्माण और नाला सफाई: शिकायत में कहा गया है कि ग्राम प्रधान ने ठेकेदार से कमीशन लेकर अपने साथियों के लिए शौचालय बनवाए, जबकि पात्र ग्रामीणों को लाभ नहीं मिला, नाला सफाई का कार्य भी सिर्फ़ कागज़ों पर दिखाया गया

कुर्सी खरीद और दुरुपयोग: आरोप है कि ग्राम पंचायत के सार्वजनिक स्थलों, जैसे मंदिर, पंचायत भवन, या चौराहों पर कुर्सी लगाने की बजाय, प्रधान ने अपने ‘परिचितों’ के घरों के पास लगाकर निजी उपयोग करवाया और इसका बिल भुगतान कराया गया ग्राम सभा की कोई खुली बैठक नहीं हुई, शिक्षा समिति या भूमि प्रबंध समिति की बैठकें भी केवल कागज़ों में पूरी की गईं। गांव में किसी भी सूचना की मुनादी नहीं कराई गई।

                   मौके पर जांच करते अधिकारी 

जांच और कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ताओं, मुसाफ़िर यादव, श्याम राम और बनारसी ने ज़िलाधिकारी महोदय से निवेदन किया है कि इन सभी विकास कार्यों और आर्थिक गबन के विरुद्ध तत्काल उच्च स्तरीय कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने सरकारी निधि के दुरुपयोग की वसूली कराने तथा प्रधान और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ आई आर)दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई किए जाने की मांग की है

प्रश्न यह खड़ा हो रहा है कि इतने गंभीर मामले में ग्राम प्रधान का सहयोग किन-किन कर्मचारियों या अधिकारियों ने किया जिससे ग्राम सभा में इतना भुगतान हो सका? जहां एक तरफ सूबे के मुखिया जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं वही गाजीपुर जनपद में इतना गंभीर आरोप सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है ।

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