लोक अधिकार
तमकुही राज कुशीनगर । भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य डॉ वीणा गुप्ता ने नगर पंचायत सेवरही में एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि सावन का महीना न केवल आस्था का पर्व है, बल्कि यह प्रकृति के नवजीवन का उत्सव भी है। खेतों में हरियाली, आकाश में बादल, और मन में उमंग—यह ऋतु धरती और गगन के मिलन का आलंकारिक प्रतीक है तथा 9 अगस्त शनिवार को रक्षाबंधन का पावन पर्व इस सांस्कृतिक समरसता को और भी शुभ बनाता है। शिव को प्रकृति का देवता यूं ही नहीं कहा गया। पर्वत उनके धाम हैं, नदियां उनकी जटाओं से बहती हैं, वायु उनके योग का साधन है, और अग्नि व चंद्रमा उनके तेज और शीतलता का संतुलन। उनका त्रिशूल सृष्टि के तीन गुणों का प्रतीक है, और डमरू में प्रकृति का आदि नाद है।शिव की पूजा बेलपत्र, धतूरा, भांग और अन्य प्राकृतिक तत्वों से होती है, जो यह दर्शाता है कि श्रद्धा और साधना का मार्ग प्रकृति के सान्निध्य से होकर ही गुजरता है। शिव की तरह ही सावन भी औघड़, सरल और कल्याणकारी है। सावन हमें सिखाता है कि यदि हम प्रकृति से जुड़कर चलें, तो जीवन में शांति, साधना और समृद्धि सुनिश्चित है। वहीं, प्रकृति के विपरीत आचरण विनाश का ही कारण बनता है। इसीलिए सावन का यह पावन समय आत्मसंयम, प्रकृति-सम्मान और साधना का स्मरण कराता है।

