धर्मेन्द्र भारद्वाज | मऊ
मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ)। करीब 25 वर्षों से चले आ रहे दुकान के विवाद में मंगलवार को न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में विवादित दुकान को खाली कराकर मोहल्ला शेखवाड़ा निवासी मंजूरुल हक को उसका कब्जा दिलाया गया। कब्जा मिलने के बाद मंजूरुल हक ने राहत की सांस ली।
मंजूरुल हक के अनुसार, दुकान पर करीब 25 वर्षों से महमूद आलम का कब्जा था। उनका आरोप है कि इस दौरान दुकान का किराया नहीं दिया गया और बिजली के बिल का भुगतान भी नहीं किया गया। मंजूरुल हक का दावा है कि बिजली से संबंधित करीब दो लाख रुपये का बिल उन्होंने स्वयं जमा किया।
उन्होंने बताया कि विवाद बढ़ने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंच गया। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार आपसी बातचीत के माध्यम से विवाद समाप्त करने का प्रयास किया और सामने वाले पक्ष से मुकदमा वापस लेकर दुकान खाली करने का अनुरोध किया, लेकिन मामला सुलझ नहीं सका।
मंजूरुल हक ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान महमूद आलम, प्रेमचंद वर्मा आदि की ओर से उनके खिलाफ मुकदमेबाजी की गई, जिससे उन्हें लंबे समय तक मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में दुकान खाली कराई गई और मंजूरुल हक को कब्जा सौंप दिया गया। कार्रवाई के बाद उन्होंने कहा कि करीब ढाई दशक के इंतजार के बाद उन्हें अपनी संपत्ति पर कब्जा मिल सका है।
मंजूरुल हक ने न्यायालय के आदेश के बाद हुई कार्रवाई को अपने लंबे संघर्ष के बाद मिली बड़ी राहत बताया। हालांकि, विवाद से जुड़े दूसरे पक्ष के आरोप अथवा उनका पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है।
