नंदगंज (गाजीपुर), 8 अगस्त। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले सरकारी राशन के वितरण में बरहपुर ग्राम सभा में अनियमितता के आरोपों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राशन कार्डधारकों और ग्रामीणों ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के कोटेदार पर निर्धारित मात्रा से प्रति कार्ड एक से दो किलो तक कम राशन देने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार राशन वितरण के दौरान कोटेदार पहले वितरण रजिस्टर में निर्धारित मात्रा की पूरी एंट्री करता है और लाभार्थियों से हस्ताक्षर अथवा अंगूठा लगवा लेता है। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जाता है। कार्डधारकों का कहना है कि पांच यूनिट वाले परिवारों के मोबाइल पर 5 किलो गेहूं और 20 किलो चावल मिलने का संदेश आता है, लेकिन मौके पर उन्हें एक किलो तक कम राशन दिए जाने का आरोप है।
लाभार्थियों द्वारा शिकायत किए जाने पर कोटेदार ने कथित रूप से यह सफाई दी कि उसे स्वयं सरकारी गोदाम से तौल में कम राशन मिलता है। इसी वजह से सभी कार्डधारकों को थोड़ा-थोड़ा कम राशन देकर कमी की भरपाई करने की बात कही गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
मोबाइल पर गेहूं-चावल का संदेश, हाथ में सिर्फ चावल!
ग्रामीणों ने राशन वितरण को लेकर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मोबाइल पर गेहूं और चावल दोनों मिलने का संदेश आने के बावजूद कई लाभार्थियों को केवल चावल देकर राशन पूरा होने की बात कही जाती है। इस संबंध में पूछे जाने पर कथित तौर पर कोटेदार की ओर से कहा जाता है कि इस बार केवल चावल ही उपलब्ध हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी गोदाम से खाद्यान्न की आपूर्ति में वास्तव में कमी है तो इसकी स्पष्ट जानकारी लाभार्थियों को दी जानी चाहिए। साथ ही वितरण रजिस्टर में वास्तविक रूप से दिए गए राशन की मात्रा दर्ज होनी चाहिए, जिससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
राशन कार्डधारकों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से बरहपुर की सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान की तत्काल जांच कराने, स्टॉक और वितरण रजिस्टर का मिलान कराने तथा लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवारों के लिए सरकारी राशन बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसे में यदि वितरण में अनियमितता हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की शिकायत पर संबंधित विभाग के अधिकारी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाते हैं या नहीं।
