“जखनियां क्षेत्र के बाप-बेटे ने रचा करोड़ों का चक्रव्यूह, हरियाणा पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी”
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश का गाजीपुर जिला एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है। मामला केवल दहेज का नहीं, बल्कि भारत सरकार के सीएजी जैसे गरिमामय विभाग की आड़ में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैरिज फ्रॉड का है। गाजीपुर के जखनियां क्षेत्र के एक परिवार ने खुद को क्लास-1 अफसर बताकर न केवल एक युवती का जीवन नरक बना दिया, बल्कि उसके परिवार की जीवन भर की जमापूंजी भी डकार ली।
गाजीपुर से दिल्ली तक जालसाजी का नेटवर्क
फरीदाबाद हरियाणा में दर्ज एफआईआर से पता चला कि इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार शुभम सिंह और उसका पिता अनिल कुमार सिंह है, जो ग्राम शेखपुर, डाकघर बुरहानपुर, जिला गाजीपुर के निवासी हैं। आखिर गाजीपुर के एक साधारण गांव का बेरोजगार युवक खुद को दिल्ली में सीनियर ऑडिट ऑफिसर बताकर सालों तक कैसे ठगी करता रहा? क्या आरोपी शुभम सिंह ने शादी के बाजार में खुद को बेचने के लिए सीएजी का फर्जी आईडी कार्ड या जाली दस्तावेज तैयार किए थे? यदि हाँ, तो गाजीपुर पुलिस के लिए यह बड़ी चुनौती है कि क्या जिले में कोई ऐसा सिंडिकेट सक्रिय है जो जाली सरकारी पहचान पत्र मुहैया करा रहा है?
दहेज की अंधी भूख 81 लाख नकद और गहनों की लूट
विवाह के नाम पर इस गाजीपुर निवासी परिवार ने लूट की सारी हदें पार कर दीं। शादी पक्की करने से लेकर विदाई तक आरोपियों ने 81 लाख नकद और लगभग 25 लाख के कीमती जेवरात ऐंठ लिए। लेकिन शादी के बाद जब सच्चाई सामने आई कि दामाद कोई अफसर नहीं बल्कि एक बेरोजगार जालसाज है, तो पीड़िता के परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
नपुंसकता छिपाई और फ्लैट के लिए की क्रूरता
धोखे की यह दास्तान यहीं खत्म नहीं हुई। पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाया है कि आरोपी शुभम सिंह ने अपनी नपुंसकता की बात शादी से पहले छिपाई थी जब हकीकत खुली, तो शर्मिंदा होने के बजाय आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर में 3 बीएचके फ्लैट की अवैध मांग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर पीड़िता को बेरहमी से पीटा गया, जान से मारने की धमकियां दी गईं और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया गया। हरियाणा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और अग्रिम कार्रवाई जारी है। गाजीपुर के इस सफेदपोश जालसाज परिवार ने पूरे जिले की छवि को दागदार किया है। अब देखना यह है कि कानून के लंबे हाथ इस फर्जी अफसर को कब तक सलाखों के पीछे पहुँचाते हैं।
