कुशीनगर। जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र में बीते 24 मार्च 2026 को डायल 112 पर दी गई एक कथित लूट की सूचना ने पुलिस जांच में बड़ा मोड़ ले लिया। प्रारंभिक तौर पर तीन लाख रुपये से अधिक की लूट की बात कहने वाले व्यक्ति की सूचना पर जब पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की, तो मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ। इसके बाद पुलिस द्वारा सख्ती से पूछताछ किए जाने पर पूरे प्रकरण की परतें खुलती चली गईं और एक संगठित गांजा सप्लाई सिंडीकेट का खुलासा हो गया।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह सामने आया कि लूट की कहानी पूरी तरह से मनगढ़ंत थी और इसका उद्देश्य अवैध गतिविधियों से ध्यान भटकाना था। पुलिस की कड़ाई के आगे जब कथित पीड़ित टूट गया, तो उसने गांजा तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी दी। इस खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अवैध धंधे में पुलिस विभाग के ही चार कर्मियों की संलिप्तता उजागर हुई है, जो अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए लंबे समय से जनपद में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ये पुलिसकर्मी बाहरी क्षेत्रों से गांजा मंगवाकर स्थानीय स्तर पर उसकी सप्लाई कराने में भूमिका निभाते थे। लंबे समय से एक ही जनपद में तैनाती के चलते उन्होंने अपना नेटवर्क मजबूत कर लिया था। हालांकि, इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
फिलहाल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस प्रकरण में दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की गहन जांच जारी है। वहीं, संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू होने की चर्चा है।
इस मामले के सामने आने के बाद जिले में हड़कंप मच गया है। अब सभी की निगाहें जिले के पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं कि वे अपने अधीनस्थों की संलिप्तता पर किस प्रकार की सख्त कार्रवाई करते हैं और इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
