♦बैंक के संवेदनशील डेटा से खेलता रहा बिहार का सॉल्वर, IBPS की अभेद्य सुरक्षा की उड़ी धज्जियां♦
गाजीपुर। देश के सरकारी बैंकों में भर्ती की सबसे बड़ी और सुरक्षित मानी जाने वाली संस्था, आई०बी०पी०एस० की परीक्षा प्रणाली को माफियाओं ने पूरी तरह से खोखला कर दिया है। जनपद गाजीपुर की कोतवाली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर ने इस बात का पर्दाफाश किया है कि हमारे बैंकों की कुर्सियों पर असल में कौन बैठा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यूको बैंक की गाजीपुर शाखा में पदस्थ राजेश कुमार नामक कर्मचारी असल में एक शातिर बहरूपिया निकला, जिसने एक संगठित सॉल्वर गैंग की मदद से बैंकिंग सिस्टम में घुसपैठ की थी।
सिस्टम को हैक करने का खौफनाक खेल
यह केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा माफिया का कृत्य प्रतीत होता है। 01 जुलाई 2022 को आई०बी०पी०एस० द्वारा जारी क्लर्क भर्ती में नवादा बिहार के राजेश कुमार ने आवेदन किया। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में उसने अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को बैठाया और बायोमेट्रिक विवरण में भी भारी हेराफेरी की। सबसे गंभीर और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जब 03 नवंबर 2025 को लखनऊ अंचल कार्यालय में संदेह के आधार पर दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया, तो राजेश का फिंगरप्रिंट और चेहरा पुराने रिकॉर्ड से बिल्कुल मेल नहीं खाया। आईबीपीएस की जांच में खुलासा हुआ कि राजेश के बायोमेट्रिक विवरण उन अन्य संदिग्ध लोगों के डेटा से भी मिल रहे थे, जो पहले भी परीक्षाएं दे चुके हैं। यह साफ है कि एक ही सॉल्वर गैंग कई अभ्यर्थियों की जगह बैठकर बैंकिंग सिस्टम में फर्जी अधिकारियों की फौज खड़ी कर रहा है।
सालों तक अंधी रही बैंक की आंतरिक सुरक्षा
इस पूरे प्रकरण में बैंक प्रशासन की कार्यप्रणाली भी गहरे सवालों के घेरे में है। 13 जून 2023 को नियुक्ति पत्र पाने वाला यह जालसाज 03 जुलाई 2023 से पीलीभीत शाखा में और फिर 14 अक्टूबर 2025 से गाजीपुर शाखा में बेखौफ होकर काम करता रहा। लगभग ढाई साल तक वह ग्राहकों के खातों, बैंक के गोपनीय डेटा और जनता के पैसों से खेलता रहा, और सिस्टम को भनक तक नहीं लगी। क्या बैंक में दस्तावेजों के सत्यापन की कोई ठोस प्रक्रिया नहीं है?
मामले की गंभीरता को देखते हुए 07 फरवरी 2026 को आरोपी को सेवामुक्त जरूर कर दिया गया, लेकिन इतने सालों में सरकारी खजाने से वेतन और भत्तों के रूप में जो लाखों रुपये लूटे गए, उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
एफआईआर दर्ज, अज्ञात आकाओं की तलाश
यूको बैंक के शाखा प्रबंधक नवनीत कुमार की तहरीर पर 24 मार्च 2026 को गाजीपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों के तहत शिकंजा कसते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा के तहत आरोपी के खिलाफ कूटरचना, प्रतिरूपण, धोखाधड़ी और संगठित आपराधिक षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में राजेश कुमार के साथ अन्य अज्ञात व्यक्तियों का भी स्पष्ट उल्लेख है। अब देखना यह है कि क्या गाजीपुर पुलिस की जांच सिर्फ इस एक मोहरे तक सीमित रहती है, या वह उस मास्टरमाइंड और सॉल्वर गैंग के गिरेबान तक पहुंच पाती है, जिसने आई०बी०पी०एस० जैसी संस्था की साख को मिट्टी में मिला दिया है।
